डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार आ रही कमजोरी को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग कम करने और रुपये पर दबाव घटाने के लिए कई नए नियम लागू करने का फैसला किया है. खास बात यह है कि RBI इन कदमों के जरिए रुपये को संभालना चाहता है, लेकिन ब्याज दरों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी करके अर्थव्यवस्था की रफ्तार को धीमा नहीं करना चाहता. रुपये की कमजोरी के पीछे महंगे कच्चे तेल, डॉलर की बढ़ती मांग और विदेशी निवेशकों की ओर से पैसा निकालने जैसे कारण हैं. ऐसे में RBI के इन कदमों का कितना फायदा होगा, यह काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगा. RBI ने क्या कदम उठाए?RBI ने सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर की जरूरत पूरी करने के लिए एक विशेष व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया है. इसके तहत इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां अपनी रोजाना की डॉलर जरूरत सीधे RBI से पूरी कर सकेंगी. यह व्यवस्था 12 अक्टूबर 2026 से लागू होगी. आमतौर पर तेल कंपनियों को विदेश से कच्चा तेल खरीदने के लिए डॉलर की जरूरत होती है. इसके लिए वे बाजार से डॉलर खरीदती हैं. जब बड़ी कंपनियां एक साथ ज्यादा डॉलर खरीदती हैं, तो डॉलर की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव पड़ता है. अब इन कंपनियों को सीधे RBI से डॉलर मिलने पर बाजार में डॉलर की मांग कम करने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा, RBI ने विदेशी मुद्रा से जुड़े डेरिवेटिव सौदों के नियम भी सख्त किए हैं. जिन सौदों के पीछे वास्तविक लेनदेन या जरूरत नहीं है, उनमें डॉलर से जुड़ी पोजिशन लेने की सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दी गई है. साथ ही,
Source: ABP Business
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